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इस वित्तीय वर्ष में 12.5 फीसदी तक रह सकती है भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट: वर्ल्ड बैंक

विश्व बैंक ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 7.5 से 12.5 प्रतिशत का अनुमान है। इससे पूर्व विश्व बैंक ने 1 अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए 5.4 प्रतिशत ग्रोथ का अनुमान जताया था। विश्व बैंक ने कहा है कि भारत की ग्रोथ कई चीजों पर निर्भर करेगी। विश्व बैंक ने अपनी इस साउथ एशिया इकोनॉमिक फोकस रिपोर्ट को इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (आईएमएफ) में आयोजित सालाना स्प्रिंग मीटिंग से पहले जारी किया है। वर्ल्ड बैंक से पहले अमेरिकी रेटिंग एजेंसी फिच ने भी भारतीय रेटिंग का आगे तिमाही में 11.8 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया था। 


वैक्सीनेशन कार्यक्रम पर निर्भर करेगी जीडीपी ग्रोथ


विश्व बैंक ने कहा है कि जीडीपी ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि वैक्सीनेशन कार्यक्रम किस तरह आगे बढ़ता है, आवाजाही पर किस तरह से प्रतिबंध लगाए जाते हैं। इसके अलावा अगले वित्त वर्ष 2021-22 में जीडीपी ग्रोथ भी इस पर निर्भर करेगी कि वैश्विक अर्थव्यवस्था कितनी तेजी से रिकवर होती है। विश्व बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट (साउथ एशिया रीजन) हंस टिमर के मुताबिक महामारी पक्ष की बात करें तो भारत में हर किसी को वैक्सीन का डोज देना भी बहुत बड़ी चुनौती है।

 

मंदी से बाहर आई इकोनॉमी


फरवरी महीने में जो GDP का डेटा आया था उसके मुताबिक भारत की इकनॉमी तकनीकी रूप से मंदी से बाहर आ गई है। वित्तीय वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ पॉजिटिव टेरिटरी में रही थी। तब जीडीपी ग्रोथ 0.4% रही। वहीं पूरे वित्तीय वर्ष के लिए GDP ग्रोथ -8% रहने का अनुमान है। कोरोना वायरस संकट के दौरान गिरी इकनॉमी अब फिर से बाहर आ चुकी है, हालांकि पहले के स्तर पर पहुंचने में वक्त लगेगा।

 

पॉवर्टी रेट में गिरावट का अनुमान


घरेलू और महत्वपूर्ण एक्सपोर्ट मार्केट्स में आर्थिक गतिविधियां धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं, वित्तीय वर्ष 2022-23 में चालू खाते का घाटा 1 फीसदी रह सकता है। इस रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2022 में सरकारी घाटा जीडीपी के 10 फीसदी से अधिक बना रह सकता है। इसके मुताबिक ग्रोथ सामान्य होने और लेबर मार्केट में सुधार होने की उम्मीद के चलते गरीबी में कमी हो सकती है और कोरोना से पहले की स्थिति आ सकती है। वित्त वर्ष 2022 में पॉवर्टी रेट (1.90 अमेरिकी डॉलर लाइन) कोरोना महामारी से पहले की स्थिति में पहुंच सकती है और इसके 6-9 फीसदी के बीच रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2024 तक यह कम होकर 4-7 फीसदी तक रह सकता है।

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